International Research Journal of Commerce , Arts and Science
( Online- ISSN 2319 - 9202 ) New DOI : 10.32804/CASIRJ
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सरस्वतीकण्ठाभरण का वैशिष्ट्य
1 Author(s): MOHINI ARYA
Vol - 5, Issue- 9 , Page(s) : 44 - 50 (2014 ) DOI : https://doi.org/10.32804/CASIRJ
ग्यारहवीं शताब्दी में परमार वंश में एक ऐसे मनीषी का प्रादुर्भाव हुआ, जिसने संस्कृत के विभिन्न क्षेत्रों को अपनी रचनाओं से उपकृत किया। वे मनीषी हैं सरस्वतीमाता के वरदपुत्र महाराज भोजदेव। उनकी सर्वतोन्मुखी प्रतिभा को देखकर कोई भी विद्वान् आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह सकता क्योंकि भोजदेव की रचनायें विश्व में न केवल संख्या की दृष्टि से अपितु विषय की विविधता से भी अपूर्व हैं। भोज ने काव्यशास्त्र, व्याकरणशास्त्र, दर्शनशास्त्र, वास्तुशास्त्र, युद्धकौशल, आयुर्वेद आदि सभी शास्त्रों से सम्बन्धित ग्रन्थों की रचना की।